हाई-रिस्क प्रेगनेंसी क्या है?

Tired pregnant woman sitting on sofa.

गर्भावस्था के दौरान थकी हुई गर्भवती महिला सोफे पर बैठी हुई।

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी वह स्थिति होती है जिसमें गर्भावस्था के दौरान मां या बच्चे के स्वास्थ्य पर सामान्य से अधिक खतरा रहता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में जटिलताएं होंगी, बल्कि इसका संकेत होता है कि इस गर्भावस्था में विशेष देखभाल और नियमित मेडिकल निगरानी की जरूरत होती है।

आज के समय में सही समय पर जांच, आधुनिक इलाज और डॉक्टर की सलाह से अधिकांश हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में सुरक्षित डिलीवरी संभव है।

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी क्यों होती है?

कई कारणों की वजह से किसी महिला की प्रेगनेंसी को हाई-रिस्क माना जा सकता है। ये कारण गर्भधारण से पहले भी हो सकते हैं और गर्भावस्था के दौरान भी विकसित हो सकते हैं।

मुख्य कारण:

  • मां की उम्र 18 साल से कम या 35 साल से अधिक होना
  • पहले से मौजूद बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर
  • थायरॉइड या हार्ट से जुड़ी समस्या
  • पीसीओएस या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से गर्भधारण
  • पहले प्रेगनेंसी में जटिलताएं
  • जुड़वा या एक से ज्यादा बच्चे
  • एनीमिया या पोषण की कमी

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी के प्रकार

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी अलग-अलग कारणों से हो सकती है।

कुछ आम प्रकार:

  • डायबिटीज से जुड़ी प्रेगनेंसी
  • हाई ब्लड प्रेशर या प्री-एक्लेम्पसिया
  • प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याएं
  • गर्भ में बच्चे की ग्रोथ कम होना
  • समय से पहले डिलीवरी का खतरा

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी के लक्षण

कई बार हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

चेतावनी संकेत:

  • बार-बार चक्कर आना
  • अत्यधिक थकान
  • पैरों, चेहरे या हाथों में ज्यादा सूजन
  • सिरदर्द या धुंधला दिखना
  • पेट में तेज दर्द
  • योनि से ब्लीडिंग
  • बच्चे की हलचल कम महसूस होना

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान कैसे होती है?

डॉक्टर नियमित जांच के दौरान कुछ टेस्ट और रिपोर्ट के आधार पर हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान करते हैं।

जांच में शामिल हो सकता है:

  • नियमित ब्लड प्रेशर जांच
  • ब्लड टेस्ट
  • अल्ट्रासाउंड
  • शुगर टेस्ट
  • यूरिन टेस्ट
  • फेटल मॉनिटरिंग

इन जांचों से मां और बच्चे दोनों की स्थिति पर नजर रखी जाती है।

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में क्या सावधानियां जरूरी हैं?

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में सामान्य से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।

जरूरी सावधानियां:

  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित चेकअप
  • दवाएं समय पर लेना
  • पर्याप्त आराम करना
  • भारी काम और तनाव से बचना
  • संतुलित और पोषणयुक्त आहार
  • किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में डाइट का महत्व

सही डाइट मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी होती है।

डाइट में शामिल करें:

  • आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर भोजन
  • हरी पत्तेदार सब्जियां
  • दालें और प्रोटीन युक्त आहार
  • दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स
  • पर्याप्त पानी

इनसे शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और जटिलताओं का खतरा कम होता है।

Pregnant woman eating healthy salad.

गर्भावस्था में पौष्टिक सलाद खाती हुई महिला।

क्या हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में नॉर्मल डिलीवरी संभव है?

यह पूरी तरह मां और बच्चे की स्थिति पर निर्भर करता है। कई मामलों में सही देखभाल से नॉर्मल डिलीवरी संभव होती है। कुछ स्थितियों में डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दे सकते हैं, ताकि मां और बच्चे दोनों सुरक्षित रहें।

मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान क्यों जरूरी है?

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में चिंता और डर होना स्वाभाविक है। लेकिन ज्यादा तनाव मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

इसके लिए:

  • परिवार का सहयोग
  • डॉक्टर से खुलकर बात करना
  • हल्की रिलैक्सेशन एक्सरसाइज
  • सकारात्मक सोच

मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर गर्भावस्था के दौरान:

  • अचानक तेज दर्द
  • भारी ब्लीडिंग
  • सांस लेने में तकलीफ
  • बच्चे की हलचल बंद हो जाए

तो तुरंत मेडिकल सहायता लें।

Prakash Hospital में हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की देखभाल

Prakash Hospital में हाई-रिस्क प्रेगनेंसी के लिए अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों की टीम, आधुनिक जांच सुविधाएं और 24x7 मेडिकल सपोर्ट उपलब्ध है। यहां हर गर्भवती महिला की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत देखभाल और सुरक्षित डिलीवरी पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

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