
रोटेटर कफ इंजरी (Shoulder Injury) क्या है?
कंधा हमारे शरीर का सबसे अधिक गतिशील जोड़ है। यह 360 डिग्री घूम सकता है और हर दिन सैकड़ों हरकतों में हिस्सा लेता है। इस अद्भुत गतिशीलता के पीछे होती है रोटेटर कफ (Rotator Cuff) — चार मांसपेशियों और उनके टेंडन का एक समूह जो कंधे के जोड़ को सुरक्षित और स्थिर रखता है।
जब इन मांसपेशियों या टेंडन में खिंचाव, आंशिक फटाव या पूर्ण फटाव हो जाता है, तो उसे रोटेटर कफ इंजरी कहते हैं। यह एक बहुत आम समस्या है जो खिलाड़ियों, शारीरिक मेहनत करने वालों और बुजुर्गों में अधिक देखी जाती है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि रोटेटर कफ इंजरी क्यों होती है, इसके लक्षण क्या हैं और इसका इलाज कैसे किया जाता है।
रोटेटर कफ चार मांसपेशियों से मिलकर बना होता है:
ये चारों मांसपेशियां मिलकर कंधे की हड्डी को सॉकेट में टिकाए रखती हैं और कंधे की हर हरकत को नियंत्रित करती हैं।
भारी वजन उठाना, गिरने पर हाथ से जमीन थामना या अचानक कंधे पर जोर पड़ना। यह अचानक और तेज बल के कारण रोटेटर कफ को नुकसान पहुंचाता है।
क्रिकेट, बैडमिंटन, तैराकी जैसे खेलों में और पेंटिंग, बढ़ईगीरी जैसे कामों में कंधे का बार-बार एक ही तरह इस्तेमाल होता है। इससे धीरे-धीरे टेंडन में टूट-फूट होती है।
40 साल की उम्र के बाद टेंडन की रक्त आपूर्ति कम होने लगती है और वे कमजोर हो जाते हैं। इससे साधारण कामों में भी इंजरी हो सकती है।
कंधे की हड्डी पर कभी-कभी अतिरिक्त हड्डी बढ़ जाती है जिसे Bone Spur कहते हैं। यह रोटेटर कफ के टेंडन को रगड़ता है और उन्हें नुकसान पहुंचाता है।
लंबे समय तक गलत पोस्चर में काम करना, जैसे कंप्यूटर पर झुककर बैठना, कंधे पर अनावश्यक दबाव डालता है।
अगर कंधे की सहायक मांसपेशियां कमजोर हों तो रोटेटर कफ पर अधिक दबाव पड़ता है।
टेंडन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होता है लेकिन पूरी तरह नहीं टूटता। दर्द होता है लेकिन कंधे की हरकत बनी रहती है।
टेंडन पूरी तरह फट जाता है। कंधे की ताकत और हरकत बहुत कम हो जाती है। इसमें अक्सर सर्जरी की जरूरत होती है।
अत्यधिक उपयोग से टेंडन में सूजन आ जाती है। यह इंजरी का प्रारंभिक चरण होता है।
कंधे की हड्डी और रोटेटर कफ टेंडन के बीच जगह कम होने से टेंडन रगड़ता और दर्द होता है।
कंधे में दर्द जो हाथ ऊपर उठाने, पीछे ले जाने या रात को सोने पर बढ़ जाता है। यह दर्द बाहु तक भी जा सकता है।
हाथ ऊपर उठाने, वजन उठाने या पीछे की तरफ ले जाने में कमजोरी महसूस होना।
कंघी करना, पीठ खुजाना या शर्ट पहनना जैसे सामान्य काम करने में दर्द और तकलीफ।
कंधे को हिलाते समय क्लिक या क्रेक की आवाज आना।
प्रभावित कंधे पर लेटने पर रात को दर्द बहुत बढ़ जाता है जिससे नींद प्रभावित होती है।
लंबे समय तक इंजरी रहने पर कंधे में अकड़न (Stiffness) आ जाती है।
NSAIDs (Ibuprofen, Naproxen) दर्द और सूजन कम करने में मदद करती हैं।
रोटेटर कफ की रिकवरी में फिजियोथेरेपी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है:

रोटेटर कफ को मजबूत करने वाले व्यायाम
तेज दर्द और सूजन में Corticosteroid इंजेक्शन तुरंत राहत दे सकता है।
यह एक आधुनिक उपचार है जिसमें मरीज का अपना खून लेकर उससे तैयार PRP को इंजरी वाली जगह इंजेक्ट किया जाता है।
अगर टेंडन पूरी तरह फट गया हो या फिजियोथेरेपी से आराम न मिले तो:
खेल या एक्सरसाइज से पहले अच्छी तरह वॉर्म-अप और कंधे की स्ट्रेचिंग जरूर करें।
भारी वजन उठाते समय कंधे नहीं, पैरों और पीठ की मांसपेशियों का इस्तेमाल करें।
नियमित रूप से रोटेटर कफ स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज करें।
बैठते और खड़े होते समय कंधे सीधे रखें। कंप्यूटर की ऊंचाई सही रखें।
लगातार काम के बीच कंधे को आराम दें।
रोटेटर कफ इंजरी का समय पर इलाज न होने पर कंधे की स्थायी कमजोरी और अकड़न हो सकती है।
Prakash Hospital में अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन, MRI डायग्नोसिस, आर्थोस्कोपिक सर्जरी और एडवांस फिजियोथेरेपी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां हर मरीज को चोट की गंभीरता के अनुसार सर्वोत्तम और व्यक्तिगत उपचार योजना दी जाती है।
1. क्या रोटेटर कफ इंजरी बिना सर्जरी के ठीक हो सकती है?
हां, आंशिक फटाव और Tendinitis अक्सर फिजियोथेरेपी और दवाइयों से ठीक हो जाते हैं।
2. रोटेटर कफ सर्जरी के बाद रिकवरी में कितना समय लगता है?
सर्जरी के बाद पूरी रिकवरी में 4–6 महीने तक लग सकते हैं।
3. क्या रोटेटर कफ इंजरी में एक्सरसाइज करनी चाहिए?
तेज दर्द में नहीं, लेकिन डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में धीरे-धीरे एक्सरसाइज शुरू करनी चाहिए।
4. रोटेटर कफ इंजरी किस उम्र में ज्यादा होती है?
यह किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 40 साल से ऊपर के लोगों में अधिक आम है।
5. क्या MRI से रोटेटर कफ इंजरी का सटीक पता चलता है?
हां, MRI सबसे सटीक जांच है जो टेंडन के फटाव की सटीक स्थिति और गंभीरता बताती है।
6. रोटेटर कफ इंजरी में क्या नहीं करना चाहिए?
भारी वजन उठाना, हाथ को जोर से पीछे ले जाना और दर्द को नजरअंदाज करना बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
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