
एक डॉक्टर महिला की गर्दन की जांच करते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो थायरॉइड जांच की आवश्यकता को दर्शाता है।
थायरॉइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर, वजन, हार्मोन संतुलन और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
समस्या यह है कि थायरॉइड के लक्षण अक्सर सामान्य थकान, वजन बढ़ने या तनाव जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में सही समय पर थायरॉइड टेस्ट करवाना बेहद जरूरी हो जाता है।
इस लेख में जानेंगे कि थायरॉइड टेस्ट कब करवाना चाहिए, कौन से लक्षण संकेत देते हैं, कौन-कौन से टेस्ट होते हैं और किन लोगों को नियमित जांच करवानी चाहिए।
थायरॉइड एक तितली के आकार की ग्रंथि है जो गर्दन के सामने स्थित होती है। यह मुख्य रूप से दो हार्मोन बनाती है:
• T3 (Triiodothyronine)
• T4 (Thyroxine)
इन हार्मोन्स को नियंत्रित करने के लिए पिट्यूटरी ग्रंथि TSH (Thyroid Stimulating Hormone) बनाती है।
यदि हार्मोन ज्यादा बनें तो हाइपरथायरॉइडिज्म और कम बनें तो हाइपोथायरॉइडिज्म होता है।
यदि शरीर में थायरॉइड हार्मोन कम बन रहे हों तो:
• लगातार थकान
• वजन बढ़ना
• ठंड ज्यादा लगना
• बाल झड़ना
• कब्ज
• चेहरे या पैरों में सूजन
• पीरियड्स अनियमित होना
इन लक्षणों में थायरॉइड टेस्ट जरूरी हो सकता है।
यदि हार्मोन ज्यादा बन रहे हों तो:
• तेजी से वजन कम होना
• दिल की धड़कन तेज होना
• घबराहट
• हाथ कांपना
• ज्यादा पसीना
• नींद न आना
• चिड़चिड़ापन
ऐसे मामलों में तुरंत जांच करवानी चाहिए।
महिलाओं में थायरॉइड समस्याएं ज्यादा देखी जाती हैं। जांच करवाना जरूरी है यदि:
• गर्भधारण की योजना हो
• बार-बार मिसकैरेज हुआ हो
• पीरियड्स अनियमित हों
• बांझपन की समस्या हो
• डिलीवरी के बाद अत्यधिक कमजोरी हो
यदि परिवार में किसी को थायरॉइड है, तो नियमित जांच कराना बेहतर होता है।
बिना कारण वजन बढ़ना या घटना थायरॉइड असंतुलन का संकेत हो सकता है।
• 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं
• गर्भवती महिलाएं
• डायबिटीज मरीज
• ऑटोइम्यून रोग वाले व्यक्ति
• हृदय रोगी
• जिनको पहले थायरॉइड की समस्या रही हो
सबसे सामान्य और प्रारंभिक जांच। यह बताता है कि थायरॉइड ठीक से काम कर रहा है या नहीं।
हार्मोन स्तर को मापते हैं।
ऑटोइम्यून कारणों की जांच के लिए।
यदि गर्दन में सूजन या गांठ हो।
• सामान्य ब्लड टेस्ट
• खाली पेट जरूरी नहीं (अधिकांश मामलों में)
• रिपोर्ट आमतौर पर 24 घंटे में मिल जाती है
हाँ, विशेषकर:
• 30 वर्ष के बाद
• गर्भावस्था की योजना से पहले
• परिवार में इतिहास होने पर
• लंबे समय से थकान होने पर
यदि समय पर जांच न हो तो:
• हृदय रोग
• बांझपन
• डिप्रेशन
• कोलेस्ट्रॉल बढ़ना
• गर्भावस्था जटिलताएं
TSH की समय-समय पर जांच।
डॉक्टर द्वारा दी गई दवा समय पर लें।
• आयोडीन युक्त नमक
• प्रोटीन युक्त भोजन
• हरी सब्जियां
योग, ध्यान और पर्याप्त नींद मददगार होते हैं।
प्रश्न 1: थायरॉइड टेस्ट कितनी बार करवाना चाहिए?
यदि सामान्य हो तो साल में एक बार। समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह अनुसार।
प्रश्न 2: क्या थायरॉइड टेस्ट खाली पेट करना जरूरी है?
अधिकांश मामलों में जरूरी नहीं, लेकिन डॉक्टर की सलाह मानें।
प्रश्न 3: क्या थायरॉइड पूरी तरह ठीक हो सकता है?
कुछ मामलों में नियंत्रित किया जा सकता है। दवा नियमित लेना जरूरी है।
प्रश्न 4: क्या वजन बढ़ना हमेशा थायरॉइड के कारण होता है?
नहीं, लेकिन अचानक बदलाव हो तो जांच जरूरी है।
प्रश्न 5: क्या गर्भावस्था में थायरॉइड जांच जरूरी है?
हाँ, क्योंकि यह मां और बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
थायरॉइड की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और अक्सर लोग इसे सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। सही समय पर थायरॉइड टेस्ट करवाना भविष्य की गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।
यदि आपको थकान, वजन में बदलाव या हार्मोनल असंतुलन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो जांच में देरी न करें।
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